Wednesday, February 15, 2012

तुम भी एक नज़र मेरी तरफ देखो, ना जाने क्यों ऐसी ख्वाहिश है ...













ज़श्न हैं,जाम है,मजलिस है, इनके बावजूद दिल में एक खलिश है....
गाता हु, गुनगुनाता हु, ये फ़क़त जिंदा रहने की एक कोशिश है....

हिज्र तो जैसे तकदीर की लकीर पे लिखा है पक्की स्याही से..
तकदीर तकदीर सही, यादो में आते रहना बस इतनी गुज़ारिश है...

देखा है ज़माना मैंने, जिंदगी इसमें बड़ी दूर-दूर तलक फैली है....
मै हमेशा ही इस तरफ ही खिचता हु, इन राहों में कुछ कशिश है.....

वैसे तो मैंने कभी कुछ भी नहीं माँगा जिंदगी से अपनी जिंदगी में.....
तुम भी एक नज़र मेरी तरफ देखो, ना जाने क्यों ऐसी ख्वाहिश है ...

Monday, February 13, 2012

लोग मिलते गए आपस में, "बेवफ़ा" मेरा नाम होता चला गया....





सबको खास बनाने की कोशिश में, मै आम होता चला गया.....
तोहमत मिली,इश्क की गलियों में मै बदनाम होता चला गया ...

हमेशा हर दिल को शाद किया, रोने को अपना कन्धा दिया...
कंधे का भीगना,दिल का टूटना बस निजाम होता चला गया.....

ना मोहब्बत मिली, ना मुरव्वत मिली,मिली तो बस तिजारत
कल तक एहतराम था, आज फ़क़त इलज़ाम होता चला गया .....


हमने तो बस सब को खुश देखना चाहा,इतनी खता है महज़
लोग मिलते गए आपस में, "बेवफ़ा" मेरा नाम होता चला गया....