Friday, September 30, 2011

मै दीये से तुम्हे रोशनी दिखाता हु......





तुम यही हो ना, मै अभी आता हु.....
बस आके, तुम्हे सबकुछ बताता हु....

कुछ खास बात नहीं,फिक्र मत करो,
अच्छा देर हो रही है, अब मै जाता हु....

कल फिर आऊंगा, साथ बैठेंगे कही,
फिर तुम्हे पूरा माज़रा समझाता हु.....

यहाँ कुछ भी यहाँ मेरा अपना नहीं,
मै तो बस पुरानी परंपरा निभाता हु.....

आज जब दुनिया चेत्नासुन्य हो रही है,
मै बस उर में चेतना के दीपक जलाता हु.......

स्व-वेदना प्रगट करना,मेरा मकसद नहीं,
मै बस सोयी हुए संवेदना को जगाता हु......


हाँ, यही रास्ता है,तुम आगे चलो,
मै दीये से तुम्हे रोशनी दिखाता हु....

Thursday, September 29, 2011

नज़र भर नीहार लू , गर तुम्हे कोई ऐतराज़ नहीं है..




गाना तो बहुत चाहता हु, पर आवाज़ नहीं है.....
दिल में है एक धुन, पर हाथ में साज़ नहीं है......

तुम जो बार बार पूछते हो,"क्या हुआ तुम्हे"
कैसे बताए, कुछ मर्ज़ है जिनका इलाज़ नहीं है.....

सुन के खनक उनके आवाज़ की अच्छा लगा ,
अब हो गया है यकीं,वो मुझसे नाराज़ नहीं है.....

तुम हकीक़त हो या ख्वाब ये अब तक राज़ है
तुम्हे मल्लिका-ए-जन्नत बनाता पर ताज नहीं है........

इन आँखों में बस तुम्हारी तस्वीर बसाना चाहता हु
नज़र भर नीहार लू , गर तुम्हे कोई ऐतराज़ नहीं है....