
न कोई मज़ा है, न कोई काम है......
जिंदगी तो बस ढलती हुई शाम है.....
ना हसरत है कोई, ना अरमान है......
ना कोई ख्वाहिश है, ना एहतराम है ........
मकसद भी नहीं कोई, ना रास्ता है..........
बिना कुछ किये ही हम तो बदनाम है......
ना चेहरा है कोई, ना मेरी कोई पहचान है.....
गुमशुदा गुमनाम हु यारो,ना कोई नाम है.....
बस चंद ठोकरे है जिंदगी में हासिल मुझे.....
यही मेरी किस्मत, यही मेरा ईनाम है..........
बस एक जुस्तजू है, किसी की तलाश है...
कुछ खास नहीं,ज़ीने की वजह बहुत आम है...
कल कलम थी जिन हाथो में आज जाम है....
वो आगाज़ था, ये मेरी जिंदगी का अंजाम है......